During the last few days of my stay at IIT, I wrote this poem. It might not have any value in the poetic world, but it certainly is near-n-dear to my heart, for it is about MM, our MTech group of girls at IIT :)
Oh yes, forgot to tell you that MM stands for Mahila Mandal !
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मिले थे हम सब तब जान पहचान नही थी
क्या ये लोग मेरे दोस्त बनेंगे ऐसी मन में आशंका थी
दो साल गुजर गए दो पलों जैसे
और हम सब बन गए एक ही फूल के पंखुडियों जैसे
नाराज़ हुई कभी में तो इन्ही लोगोंने सम्भाला
मायूस हुए मेरे मन को "तू कर सकती हैं" ये विश्वास दिलाया
याद रहेगा हमेशा मुझे -
कुहू की वो कोयल जैसी मधुर आवाज़
जादूगर जैसे हर Problem का सपना का वो Algo का जवाब
अप्सरा जैसा पाया हुआ नीला का वो रुप
हरदम हर एक चीज़ में मेघना जोश से भरपूर
नन्हें मुन्हे बच्चों जैसी रुकमा
नयी दुल्हन बनी हुई हमारी रानी रीना
अदिती का वो दिल खोलकर हसना
क्रिती का सब लोगोंको साथ में लेकर चलना
ये लोग मेरे जीवन का बन गए हैं हिस्सा
अरे, इस जगह से भी मेरा बन गया हैं रिश्ता
अब हर एक नए ख्वाब लेके अपनी दुनिया सजायेगा
यकीन हैं मुझे लेकिन यार मेरा वह हमेशा रहेगा
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